Women’s Education with handi best moments

 

Women’s Education


We are living in an age where there are great opportunities for women in social work, public life and administration. Society needs women of disciplined minds and restrained manners. Hence, women’s education is of paramount importance in present time.









Dr. Radhakrishnan is not satisfied with the type of education that Indian women are getting. Girls education is not widespread so the institutions imparting education to girls should be encouraged. The education, so imparted, must not only be broad but should also be deep and purposeful.

According to the author, compassion, daya, is the quality which is more characteristic of women than of men. It is therefore, essential for every human being, men and women alike, to develop the quality of considerateness, kindness and compassion. Without these qualities we are only human animals, nara pasu, not more than that.






Dr, Radhakrishnan says that the study of our great classics, such as the Ramayana, Upnishad, etc., and communion with great minds, are the two things that mould men’s mind and heart. They instil into us great moral strength, which will lay down for us the lines on which we have to conduct ourselves. The learned author realises the value of women’s education and says.
“Give us good women, we will have a great civilization.
Give us good mothers, we will have a great nation.”
Such is the importance of women’s education.

 



                          हिन्दी अनुवाद

(1) You are living ………………. your work.
आप एक ऐसे युग में रह रहे हैं जहाँ स्त्रियों के लिए सामाजिक कार्य में, जनजीवन में तथा प्रशासन में अनेक महान् अवसर प्राप्त हैं। समाज को अनुशासित मस्तिष्क वाली तथा संयमित आचरण वाली स्त्रियाँ चाहिए। आप चाहे कोई भी कार्य चुनें आपको उसे ईमानदारी तथा अनुशासित मस्तिष्क से करना चाहिए। तभी आपको कार्य में सफलता और आनन्द प्राप्त होंगे।

 


(2) Actually in our ………………. present generation.
हिन्दी अनुवाद–वास्तव में, हमारे देश में जहाँ तक लड़कियों की शिक्षा का सम्बन्ध है, शिक्षा काफी विस्तृत नहीं है। इसलिए प्रत्येक वह संस्था जो लड़कियों की शिक्षा में योगदान देती है वह मान्यता, उत्साह प्रदान करने के योग्य है। लेकिन मैं इस बात के लिए चिन्तित हूँ कि जो शिक्षा प्रदान की जाए वह केवल विस्तृत ही ने हो, अपितु वह जीवन के रहस्यों को जानने के योग्य भी हो। इसे गहराई में अर्थात् जीवन के रहस्यों को जानने में हम पीछे हैं। हम विद्वान् और कुशल बन सकते हैं। किन्तु यदि हमारे जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है। तब हमारा जीवन अन्धकारमय होगा, हम भारी भूलें करेंगे और फिर हमें दुःख प्राप्त होगा। गीता में कहा है। ‘व्यावसायात्मिका बुद्धिरेकेह’ अर्थात् नि:स्वार्थ कार्य में बुद्धि स्थिर होती है और एक ओर ही लगी रहती है। एक सच्चे सुसंस्कृत मस्तिष्क वाले मनुष्य को मानसिक एकरूपता तथा जीवन के उद्देश्य के प्रति प्रेम होता

है। एक असंस्कृत मनुष्य के लिए सम्पूर्ण जीवन भिन्न-भिन्न दिशाओं में बिखरा रहता है—“बहुशाखा ह्यनन्ताश्च’। अत: यह आवश्यक है कि वह शिक्षा जो आप इन संस्थाओं में प्राप्त कर रहे हैं, वह आपको केवल ज्ञान और कुशलता ही प्रदान न करे, अपितु आपको जीवन का एक निश्चित उद्देश्य भी दे। वह निश्चित उद्देश्य क्या हो यह आपको सोचना है। यह कहा जाता है कि विद्या विवेक प्रदान करती है। विमर्शरूपिणी विद्या आपको यह ज्ञान प्रदान करती है कि जिससे आप यह तय करेंगे कि क्या उचित है। वह आपको अनुचित बातों से बचने में सहायता करेगी। इसलिए आपको यह पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए कि इस पीढ़ी में आपसे क्या अपेक्षित है। एक वह उद्देश्य जो सदियों से ठीक रहा है, वह हमारे देश और संसार की तेजी से बदलती हुई परिस्थितियों में ठीक नहीं भी हो सकता। इसलिए वह उद्देश्य जो आप अपनाएँ, वह वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए।

 




(3) Every time we ………………. more than that.
जब भी हम कोई कार्य आरम्भ करते हैं तब हम अपने मन्त्रों का उच्चारण करते हैं और उस कार्य को समाप्त करते समय शान्ति-शान्ति कहते हैं। अध्यापक तथा शिष्यों से यह आशा की जाती है कि वे एक-दूसरे से घृणा करने से बचें। दया एक ऐसा गुण है जो पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक पाया जाता है। हाल ही में मैंने एक पुस्तक पढ़ी है जिसमें स्त्रियों के गुणों के ह्रास के विषय में पढ़ा है और उसका मुख्य कारण है दया की भावना का ह्रास। दूसरे शब्दों में स्त्री का प्राकृतिक गुण देया है। यदि आप में दया नहीं है तो आप मनुष्य नहीं हैं। इसलिए प्रत्येक प्राणी के लिए यह आवश्यक है कि उसे अपने में दूसरे का ध्यान रखने की भावना, दया और सहानुभूति के गुण पैदा करने चाहिए। इन गुणों के बिना हम मानव कहलाने के योग्य नहीं हैं, बल्कि केवल नर पशु हैं और अधिक कुछ नहीं।

 






(4) There is famous ………………. my dear.
एक प्रसिद्ध कविता है जो हमें बताती है कि संसार विष वृक्ष है। इस अपूर्ण विश्व में अर्थात् संसार में अद्वितीय गुणों के दो फल हैं। वे हैं अपनी महान् साहित्यिक कृतियों का अध्ययन और महान् विचारकों के साथ एकरूपता। यही वे दो बातें हैं जो मनुष्य के हृदय और मस्तिष्क को बदलती हैं। मैं इस बात के लिए उत्सुक हूँ कि हम अपनी महान् कृतियों का अध्ययन करें, देश की उन सभी महान् कृतियों का जो हमें विरासत में प्राप्त हुई हैं। एक उपनिषद् के छोटे से कथोपकथन में एक प्रश्न किया गया है, “अच्छे जीवन का सार क्या है?” शिक्षक उत्तर देता है, “क्या तुमने उत्तर नहीं सुना?” बादलों की गड़गड़ाहट होती है–दा-दा-दा, तुरन्त शिक्षक ने समझाया कि यही अच्छे जीवन का सार है दम, दान व दया। यही अच्छे जीवन का निर्माण करती हैं। दम का अर्थ है आत्म-नियन्त्रण जो मानवता का प्रतीक है। रामायण में बताया गया है जब लक्ष्मण वन को जाने लगे तब उसकी माता ने उन्हें बताया, “राम को अपने पिता दशरथ के समान समझना, सीता को अपनी माता के समान, वन को अयोध्या के समान समझना, जाओ, मेरे प्रिय बेटे।”







(5) There are ever ………………. a great nation.
हमारी साहित्यिक कृतियों में बहुत-सी ऐसी आनन्ददायक कहानियाँ हैं जो हमारे भीतर महान् नैतिक शक्ति का संचार करती हैं जो हमारे लिए ऐसी रूपरेखा बनाती हैं जिनके अनुरूप हम अपना आचरण बनाते हैं।
हमें अच्छी स्त्रियाँ दो, हमारी सभ्यता महान् होगी।
हमें अच्छी माताएँ दो, हमारा राष्ट्र महान् होगा।

 






(6) When you talk ………………. tatha.
जब आप शिक्षा के विषय में बात करते हैं तब आपके सम्मुख कुछ लक्ष्य होते हैं-जिन लोगों को शिक्षा दी जाती है उन्हें उस संसार का ज्ञान दो जिसमें वे रह रहे हैं—यह ज्ञान आप विज्ञान, इतिहास तथा भूगोल से प्राप्त कर सकेंगे। आप लोगों को कुछ तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने के लिए भी प्रशिक्षित करें ताकि वे अपना जीविकोपार्जन कर सकें। इन बातों को पूरे संसार में शिक्षा के लक्ष्यों के रूप में स्वीकार किया जाता है अर्थात् उस संसार का ज्ञान जिसमें आप रहते हैं और तकनीकी योग्यता जिसके द्वारा आप जीविकोपार्जन कर सकते हैं। किन्तु उस शिक्षा की क्या विशेषता है जो हमारे देश के विद्यालयों में दी जा रही है। हमने सुना है कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य दक्षता और ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि उच्च जीवन की प्राप्ति का प्रयास करना है। एक ऐसे संसार के निर्माण का प्रयास जो स्थान व समय से परे हो यद्यपि बाद वाला पहले वाले को प्रकाशित तथा क्रियाशील करता है। यही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य रहा है। सदियों तक हमने स्त्री जाति की उपेक्षा की है। परम्परा सम्भवतः इससे भिन्न रही है।
पुराकल्पेषु नारीनां मन्दिरा वन्दना निश्चितः।
अध्यापनाञ्च वेदानां गायत्री वाचानां तथा।।

 





(7) In ancient times ………………. into their own.
प्राचीन समय में हमारी स्त्रियों में उपनयन संस्कार होता था। वे वेदों का अध्ययन करने की अधिकारी हो जाती थीं। वे गायत्री मन्त्र का जाप करने की भी अधिकारी हो जाती थीं। ये सभी बातें हमारी स्त्रियों के लिए खुली थीं। किन्तु हमारी सभ्यता संकुचित हो गयी और स्त्रियों की पराधीनता हमारी सभ्यता के पतन का एक प्रतीक है।

स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद महात्मा गाँधी के अथक प्रयासों से हमारे देश में एक क्रान्ति आई और अब स्त्रियाँ अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं।

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