शीतयुद्ध nai niti hindi or bagheli me
शीतयुद्ध
शीत युद्ध से अभिप्राय विश्व की दो महाशक्तियों अमरीका व भूतपूर्व सोवियत संघ के बीच व्याप्त उन कटु संवधों के इतिहास से है जो तनाव, भय ईष्र्या पर आधारित था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1945-1991 के मध्य इन दोनों महाशक्तियों के बीच शीत युद्ध का दौर चला और विश्व दो गुटों में बँट गया। यह दोनों के मध्य विचारात्मक तथा राजनै. तिक संघर्ष था।
* स्मरणीय बिन्दु :- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से अब तक की
• प्रथम विश्व युद्ध - 1914 से 1918 तक
द्वितीय विश्व युद्ध - 1939 से 1945 तक
• द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक की वैश्विक घटनाओं का अध्ययन समकलीन विश्व राजनीति के विषय है।
* द्वितीय विश्व युद्ध के गुट
1) मित्र राष्ट्र सोवियत संघ, फ्रांस, ब्रिटेन संयुक्त राज्य अमेरिका
2) धुरी राष्ट्र जर्मनी, जापान, इटली।
* द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के पश्चात दो महाशक्तियों का उदय हुआ :- पूंजीवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका और समाजवादी विचारधारा के सोवियत संघ का।
* अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए दोनों ही महाशक्तियों ने अन्य देशों के साथ संधियाँ की।
* सैन्य संधि संगठन
• अमरीका
1. NATO - (1949) North Atlantic treaty organization
2. SEATO - (1954) South East Asian
Treaty organization
• सोवियत संघ
वारसा पैक्ट 1955
3. CENTO (1955) Central Treaty organization
• अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाते हुए तथा उनसे प्राप्त अन्य लाभों को देखते हुए महाशक्तियाँ छोटे देशों को साथ रखना चाहती थी।
• छोटे देश भी सुरक्षा, हथियार और आर्थिक मदद की दृष्टि से महाशक्तियों से जुड़े रहना चाहते थे।
• परमाणु सम्पन्न होने के कारण दोनों ही महाशक्तियों में रक्त रंजित युद्ध के स्थान पर प्रतिद्धन्दिता तथा तनाव की स्थिति बनी रही। जिसे शीत युद्ध कहा गया।
* महाशक्तियों को छोटे देशों से लाभ :-
1) छोटे देशों के प्राकृतिक संसाधन प्राप्त करना।
2) सैन्य ठिकाने स्थापित करना।
3) आर्थिक सहायता प्राप्त करना।
4) भू-क्षेत्र (ताकि महाशक्तियाँ अपने हथियारों और सेना का संचालन कर सके।
* शीतयुद्ध के दायरे :-
1) 1948 में बर्लिन की नाकेबंदी
2) 1950 में कोरिया संकट
3) 1954-1975 तक वियतनाम में अमेरिकी हस्तक्षेप
4) 1956 हंगरी में सोवियत संघ का हस्तक्षेप
5) 1962 क्यूबा मिसाइल संकट
* दो ध्रुवीयता को चुनौती :- गुट निरपेक्ष आंदोलन एशिया और अफ्रीका के नव स्वतंत्र राष्ट्रों के समक्ष अपनी स्वतंत्रता एवम् प्रभुसत्ता को बनाए रखने का तीसरा विकल्प था गुट निरपेक्ष आंदोलन में शामिल हो जाना।
* गुट निरपेक्ष आन्दोलन का पहला सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड (यूगोस्लाविया की राजधानी) में हुआ। जिसकी नींव 1955 में एफ्रो एशियाई सम्मेलन में रखी गई (बाग सम्मेलन) इस आन्दोलन के संस्थापक देश व नेता थे
• संस्थापक नेता • संस्थापक देश
1. पं. जवाहर लाल नेहरू भारत मिस्त्र
2. कर्नल नासिर. इन्डोनेशिया
3. डा. सुकर्णो यूगोस्लाविया
4. मार्शल टीटो घाना
* 17 वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन का आयोजन वेनेजुएला के "भागारिता द्वीप में सितम्बर, 2016 को किया गया। वर्तमान में इस आंदोलन के सदस्यों की संख्या 120 है। साथ ही साथ वर्तमान से इसके 17 देश तथा 10 अंतर्राष्ट्रीय संगठन पर्यवेक्षक है इस शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुधार, पश्चिम एशिया की स्थिति, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों, जलवायु परिर्वतन, सतत विकास शरणार्थी समस्या और परमाणु निशस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
18वा NAM सम्मेलन का आयोजन अजरबेजान में 2019 में होना तय हुआ है।
* नव अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (N.I.E.O) 1972 में UNO के व्यापार एवम् विकास आंदोलन (UNCTAD) में विकास के लिए एक नई व्यापार नीति का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया ताकि धनी देशों द्वारा नव स्वतन्त्र गरीब देशों का शोषण न हो सके।
दुवाईस अ न्यू ट्रेड पॉलिसी फॉर डेवलेपमेंट (विकास के लिए नई व्यापारिक नीति की ओर) एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
* भारत और शीतयुद्ध :- शीतयुद्ध के दौरान भारत ने नव स्वतंत्र देशों का नेतृत्व किया तथा अपने राष्ट्रीय हितों को पूरा किया। और दोनों महाशक्तियों के मतभेदों को भी दूर करने का प्रयास किया।
* शस्त्र नियंत्रण संधियाँ :-
1. TB.T. सीमित परमाणु परीक्षण संधि - 5 अगस्त 1963
2. SALT सामारिक अस्त्र परिसीमन वार्ता - 1) 26 मई 1972, 2) 18 जून 1972
3. START - सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि - 1) 31 जुलाई 1991, 2)3 जनवरी 1993
4. N.P.T. परमाणु अप्रसार संधि 1 जुलाई 1968
(पांच परमाणु सम्पन्न देश फ्रांस, जर्मनी, अमरीका, ब्रिटेन, रूस ( पूर्व सोवियत संघ) ही परमाणु परीक्षण कर सकते थे अन्य देश नहीं।)
शीतयुद्ध का अर्थ होता है जब दो या दो से अधिक देश के बीच ऐसी स्थिति बन जाए कि लगे युद्ध होकर रहेगा परंतु वास्तव में कोई युद्ध ना हो।
इसमें युद्ध की पूरी संभावना रहती है युद्ध की आशंका, डर, तनाव, संघर्ष जारी रहता है लेकिन युद्ध नहीं होता
ऐसा अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच में हुआ
शीत युद्ध ( 1945-1991 ) तक हुआ |
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